किसी भी फैक्ट्री या उद्योग की सफलता केवल मेहनत पर नहीं, बल्कि वहां की ऊर्जा और दिशाओं के संतुलन पर भी निर्भर करती है। अक्सर देखा गया है कि मशीनों का बार-बार खराब होना या लेबर का न टिकना वास्तु दोष का संकेत होता है।
1. अग्नि तत्व का सही स्थान (Fire Element)
फैक्ट्री में बॉयलर, जनरेटर या बिजली का मेन पैनल हमेशा दक्षिण-पूर्व (South-East) यानी आग्नेय कोण में होना चाहिए। यदि यह गलत दिशा में है, तो न केवल दुर्घटनाओं का भय रहता है, बल्कि लेबर के साथ भी विवाद बने रहते हैं।
2. कच्चे माल और तैयार माल का संतुलन
वास्तु के अनुसार, कच्चा माल (Raw Material) हमेशा भारी होने के कारण दक्षिण-पश्चिम में रखना चाहिए। वहीं तैयार माल (Finished Goods) को उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा में रखने से उसकी बिक्री तेज़ी से होती है।
3. बिना तोड़-फोड़ के वैज्ञानिक उपाय
आज के आधुनिक युग में फैक्ट्री की दीवारों को तोड़ना संभव नहीं होता। इसलिए हम Energy Mapping और धातु की पट्टियों (Metal Strips) के माध्यम से बिना किसी निर्माण कार्य के वास्तु दोष को जड़ से खत्म करते हैं।
नोट: लुधियाना जैसे औद्योगिक शहर में हमने अनेक फैक्ट्रियों का वास्तु सुधार कर उनके उत्पादन में 30-40% तक की वृद्धि देखी है।